रांची: एमिटी ने करवाया टैलेंट शो रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण ने कहा

  • कला भी ज्ञान का हिस्सा है, इसका भी विकास होना चाहिए
रांची : कला भी ज्ञान का हिस्सा है, इसका विकास होना बहुत ज़रूरी है। मुझे गर्व है एमिटी यूनिवर्सिटी ने इसे गंभीरता से लिया और मुझे इसका कार्यक्रम का हिस्सा बनाया। छात्रों में अनुशासन होना बहुत महत्वपूर्ण बात है। जिस तरह से आर्मी में अनुशासन हमें हर चीजों को सीखने में मदद देता है। उसी प्रकार जिंदगी के हर क्षेत्र में अगर हम अनुशासित रहे तो हम हर सफलता पा सकते हैं।

एक सैनिक की ख़ासियत होती है कि वो किसी भी स्थान, परिस्तिथि में रह सकता है। एक सैनिक उदास चेहरे पर मुस्कान ला सकता है। और ये हुनर आपसबों में भी है, जिसे कला कहते है। ज़िन्दगी हमें मौका देती है.., तो कभी मौके पर खुद को साबित करना पड़ता है। आज आपको गाते, नाचते और मनोरंजन करते देखा तो उन सैनिकों का ख्याल आ गया, जो सीमा पर तैनात रहते है। दुश्मनों पर कड़ी नज़र रखते हैं। युद्ध के लिए सीना ताने खड़े रहते हैं। इतना ही नहीं खुद नाचते, गाते, बजाते और खुद ही मनोरंजन करते हैं। उक्त बातें रिटायर लेफ्टिनेंट जनरल ज्ञान भूषण सिंह ने एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के टैलेंट शो में बतौर मुख्य अतिथि कहीं।

एमिटी यूनिवर्सिटी ने नृत्य और गायन प्रतियोगिता करवाकर कोशिश की कि छात्रों में छिपे प्रतिभा को निखारा जाये। इसके लिए टैलेंट शो का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में झारखण्ड सहित राजस्थान के स्कूलों एवं कॉलेजों के छात्र- छात्राओं ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का उद्देश्य बिलकुल साफ था, बच्चों में छिपे हुए कला को उभार कर लोगों के सामने प्रस्तुत करना।
एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के कुलपति प्रोफेसर डॉ. रमन कुमार झा ने छात्रों को प्रोत्साहित किया। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि उनके अन्दर हर कला है, बस पहचानने की देर है। उनके प्रतिभाओं की सराहना भी की।

संस्थान के निदेशक प्रोफेसर डॉ अजीत कुमार पांडेय ने छात्रों को पढ़ाई के साथ – साथ खेलकूद, नृत्य, गायन इत्यादि में बढ़ चढ़कर हिस्सा लेने को प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि गाना- बजाना, नाचना और भी कई सारे कला है जो छात्रों को ही नहीं बल्कि सभी को चिन्तामुक्त करने में सहायक होते हैं। आज के दौर में प्रतियोगिता इतनी तेजी से बढ़ रही है कि थोडा सा भी देर हुआ तो मौका हाथ से निकल जायेगा। ऐसे में छात्रों को प्रतियोगिता के लिए हमेशा तैयार रहना होगा, और इसके लिए ज़रूरी है दिलों-दिमाग का शांत होना। इसके लिए नाचना, गाना, बजाना और खेलना- कूदना अचूक उपाय है।

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नए साल के इस स्वागत समारोह में हमारी कोशिश है कि हम उन्हें डिसिज़नमेकर, ऑलराउंडर और विनर बनाएं।
कार्यक्रम में अतिथि रूप में विकास जी, जो स्वयं मोटिवेटर है साथ ही आईआईटी जेईई कोचिंग इंस्टीट्यूट भी चलाते हैं। उन्होंने छात्रों को संबोधित करते हुए कहा कि किसी की तरह मत बनना, खुद की तरह बनो। दूसरों को मौका न दो कि वो तुम्हारी औकात बताएं। उन्होंने मनोरंजन को अपने जीवन का हिस्सा बनाने को कहा।
कार्यक्रम में विभिन्न कोचिंग इंस्टीट्यूट के निदेशक एवं शिक्षकगण मौजूद रहे। साथ ही ऊँची उड़ान संस्था की रेखा मिश्रा, आरजे वर्तिका और सैकड़ों की संख्या में दर्शक मौजूद रहे। कार्यक्रम को सफल बनाने का श्रेय समस्त एमिटी यूनिवर्सिटी झारखंड के सदस्यों को जाता है।
समृद्ध झारखण्ड के लिए रांची से ज्योति चौहान की रिपोर्ट…
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