‘मानव दास प्रथा’ का हो अंत, NHRCCB ने लिखा राष्ट्रपति को पत्र

Jyoti Chouhaan

रांची: हमारे देश के कई प्रदेश मानव दास प्रथा के जंजीर में बंधे हुए हैं। इसे ख़त्म करने के लिए सरकार कई क़ानून बना रखी हैं। लेकिन समाज़ में आज भी इस प्रथा को एक स्थान मिला हुआ है। वजह कोई भी हो।
इस बेहद नीच, घिनौने प्रथा का शिकार अरुणाचल प्रदेश भी है। जैसे ही कुछ पीड़ित के बयान, कुछ बोलती तस्वीर मिली.., वैसे ही सदियों से जारी अमानवीय, क्रूर दास प्रथा का मुद्दा राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तथा अन्य सम्बन्धित संस्थाओं को पत्र लिखकर एनएचआरसीसीबी संस्था के अध्यक्ष डॉ. रणधीर कुमार ने इस अमानवीय चलन को कड़ाई से शीघ्र रोकने व अरुणाचल प्रदेश में इस तरह बने दासों को अविलंब आजाद कराने की अपील की है।
आपको बता दें कि अरुणाचल प्रदेश में एक आंकड़े के अनुसार करीब 40 हज़ार से ज्यादा ‘मानव दास’ हैं। वहाँ यह एक सामान्य चलन है। ज्यादातर लड़कियों को मानव दास बनाया जाता है। इन लड़कियों को बचपन में ही आसाम जैसे गरीब राज्यों से या तो चुरा लिया जाता है या एजेंटस के माध्यम से उन्हें अरूणाचल की सीमा पार कराकर बेच दिया जाता है। इन मानव दासों को कोई भी व्यक्तिगत अधिकार नहीं होते हैं। वे अपने मालिक की सम्पति के समान होतीं हैं। वे ना तो अपने घर जा सकते हैं, ना ही उनको अपने काम का मेहनताना ही मिलता है। वे अपने मालिकों के ‘सेक्स स्लेव’ के रूप में भी कार्य करते हैं।
उनके जन्मे अवैध बच्चे भी इसी मानव दासता के शिकार होते हैं। अगर वे इस चंगुल से आजाद होना चाहते हैं तो इन्हें इसकी सजा कड़ी यातना, मार-पीट, शरीर दागना, जलील करना यहाँ तक की मौत तक कि सजा दी जाती है। यह एक बेहद अमानवीय और रूह को कपा देना वाला चलन है। जिसका अंत बेहद जरूरी है।
इस दासता के अंत का अभियान डॉ. रणधीर कुमार ने छेड़ दिया है। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को उन ‘ह्यूमन स्लेव्स’ की तस्वीरें और वीडियो भी भेजा है। जिसमें वे मानव दास सरकार, पुलिस, न्यायालय से अपनी रिहाई की अपील करते नजर आ रहे हैं।
उन्होंने इस अभियान में मीडिया, सरकार, पुलिस और न्यायपालिका की भूमिका का आहवान किया है। उनका कहना है कि इसे समाप्त करने हेतु संसद से सड़क तक वे उन मानव दासों के लिए लड़ेंगे। उनका कहना है कि यह बेहद शर्मनाक है कि आज 21वीं सदी में भी यह मानव गुलामी का डरावना सच दिखाता है। जिसका अंत किया जाना हम सबका नैतिक व मानवीय कर्तव्य है।
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