गर्व: गिरिडीह के रहने वाले सहायक कमांडेंट की अरुणाचल में नायाब पहल

  • देश की रक्षा के साथ ही कर रहे निःशुल्क शिक्षा सेवा
  • ‘कलम का सिपाही’ निःशुल्क अभियान की शुरुआत
  • भा.ति.सी.पुलिस के अधिकारी सुरेश वर्मा की एक नायाब पहल
रांची डेस्क: राष्ट्र को जितनी जरूरत सेना की है, उससे भी ज्यादा जरूरत है शिक्षा की। यह बातें मुंशी प्रेमचंद ने कही हैं। अब तक आपने सुना होगा कि पुलिस बल अपनी क्षमता, शौर्य, सीख का प्रदर्शन समाज मे शांति और सुरक्षा हेतु करती रही है।
मगर अरुणाचल प्रदेश के अपर सुबनसिरी जिला के सुदूर सीमावर्ती भारत तिब्बत सीमा पर बसे अंतिम गाँव टॉक्सिंग में एक नया अजूबा प्रयोग देखने को मिला है। अब पुलिस बल के हाथों में केवल हथियार ही नहीं कलम भी है।
26 नवम्बर 2017 को टॉक्सिंग गाँव में भारत भा.ति.सी.पुलिस के एक अधिकारी सुरेश वर्मा द्वारा उक्त गाँव के गरीब, वंचित, शिक्षा से कोसों दूर बच्चों के लिए एक नायाब पहल की गई है जिसमें सुरेश वर्मा स्वयं तथा उनके साथ कार्यरत अधीनस्थ अधिकारी व अन्य रैंक के पुलिस कर्मी प्रतिदिन निःशुल्क शिक्षा देने का काम कर रहे हैं।
शिक्षा की बदहाल स्थिति से गुजर रहे इस ग्राम हेतु यह पहल अंधेरे में रौशनी की तरह है। इस ग्राम के अधिकांश बच्चे स्कूली शिक्षा से संसाधनों की कमी, स्कूली शिक्षक की कमी, प्रोत्साहन की कमी और अभिभावकों द्वारा उन बच्चों को अन्यत्र कार्य मे लगाए जाने के कारण वंचित रह जा रहे थे। अधिकारी सुरेश वर्मा ने इस बदहाल स्थिति को बदलने का संकल्प लिया।
इसी संकल्प का परिणाम है “कलम का सिपाही” अभियान। ग्रामीणों ने भी इस कार्य मे उनका सहयोग किया। इस अभियान का नाम “कलम का सिपाही” रखा गया है। इससे ग्रामीणों में यह सन्देश जा रहा है कि पुलिस बल सिर्फ शांति व सुरक्षा के लिए ही नहीं है बल्कि शिक्षा भी देकर यह एक सार्थक भूमिका निभा रहा है। उनके इस पहल की तारीफ बच्चों, महिलाओं से लेकर स्थानीय बुजुर्गों तक ने की है। इस अभियान कि खुलकर प्रशंसा अपर सुबनसिरी जिले के पुलिस कप्तान (एस.पी.) श्री केनी बागरा ने भी की है। उन्होंने इसे एक बेहतर मानवीय पहल बताया है।

इस अभियान में उनके सभी कर्मियों ने सहयोग देना प्रारम्भ कर दिया है।वे इस सुदूरवर्ती सीमांत ग्राम टॉक्सिंग को आदर्श, स्वच्छ और शिक्षित ग्राम बनाना चाहते हैं। उन्होंने इस सम्पूर्ण अभियान को “स्वच्छ टॉक्सिंग, शिक्षित टॉक्सिंग” नाम देकर इस अंतिम ग्राम को एक नायाब तोहफा दिया है। स्वच्छता हेतु प्रत्येक रविवार को भा.ति.सी.पुलिस के 31वीं वाहिनी के अधिकारी तथा अन्य टॉक्सिंग ग्राम में जाकर स्वयं सफाई भी करते हैं तथा इस संदर्भ में जागरूकता भी ग्रामीणों के बीच फैलाते हैं। इसके लिए 31वीं वाहिनी के कमान्डेंट एल.टी. स्वानथांग की भी महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उन्होंने ऐसे मानवीय कार्य हेतु अपने पुलिस बल को प्रोत्साहित भी किया और इस अभियान के लिए स्वीकृति आदेश भी जारी किया। जिसके पश्चात ही इस अभियान की शुरुआत हो पाई।

इस तरह के कार्यक्रमों से ग्रामीण बच्चों और उनके प्रतिभा में निखार आएगा। वहाँ के अभिवावकगण भा.ति.सी.पुलिस के 31वीं वाहिनी के सहायक कमान्डेंट सुरेश वर्मा और इनके कमान्डेंट महोदय के प्रति आभार व्यक्त किया है। साथ ही, उन ग्रामीणों ने उम्मीद वक्त की है कि इस तरह की पहल प्रत्येक ग्राम में हो जहां पुलिस बल के कर्मी शिक्षा से वंचित बच्चों को शिक्षित कर राष्ट्र को संगठित, मजबूत, विकसित करें।
error: Content is protected !!
WhatsApp chat

हमारे मासिक पत्रिका समृद्ध झारखण्ड की अपनी प्रति आज ही सुरक्षित करने के लिए पर क्लिक करें।