रांची: आयातित महिला उम्मीदवार पर बीजेपी का दांव

– चंदन चौधरी

रांची: सियासत के दांव भी बड़े दिलचस्प होते हैं और झारखंड का नाम तो इसमें सोने पर सुहागा वाली कहावत को चरितार्थ करता है। विगत 25 वर्षों से लालू की अत्यंत करीबी व वफादार माने जानेवाली अन्नपूर्णा देवी अपनी नई राजनीतिक पारी का आगाज करने जा रही हैं। लालटेन को छोड़ कमल का दामन थामनेवाली ये प्रदेश से पार्टी की एकमात्र महिला उम्मीद्वार हैं। अविभाजित बिहार के बाद झारखंड में भी लालटेन की लौ जलाने के लिए इन्होंने कड़ी मशक्कत की है। जाहिर है कि संकट में घिरे लालू व उनके परिवार ने ऐसी कल्पना नही की होगी, कि अन्नपूर्णा भाजपा की हो जाएगी।
बहरहाल ऐसा हो चुका है और अन्नपूर्णा कोडरमा लोकसभा सीट से भाजपा प्रत्याशी हैं। भाजपा ने अपने नये दांव के लिए अपने सीटिंग एमपी रवींद्र राय को बैठा दिया है। इस दर्द की कसक तो राय को है, लेकिन कुछ बंया नही कर पा रहे हैं। गौरतलब हो कि भाजपा ने अपने सभी 14 सीटों पर प्रत्याशी का ऐलान करते हुये 4 मौजूदा सांसदों को बाहर का रास्ता दिखा दिया है। आयातित महिला प्रत्याशी भाजपा आलाकमान के विश्वास पर कितना खरा उतर पाती हैं, ये आनेवाला रिजल्ट तय करेगा। अन्नपूर्णा के लिए यह चुनौती आसान नही हैै। कोडरमा में पूर्व मुख्यमंत्री बाबूलाल मरांडी यूपीए महागठबंधन के नाते चुनाव महासमर में हैं। रिकार्ड है कि वे कोडरमा से कभी चुनाव नहीं हारे हैं।
भाकपा माले से राजकुमार यादव भी लाल झंडा लहरा रहे हैं। राजकुमार यादव का चुनाव मैदान में होना अन्नपूर्णा देवी के लिए चिंता का सबब बना हुआ है। हालांकि इन सभी से इतर अन्नपूर्णा देवी की पहचान जीवट राजनीतिज्ञ के तौर पर है।
एकीकृत बिहार के मंत्री रहे अन्नपूर्णा देवी के पति रमेश प्रसाद यादव की मौत के बाद अन्नपूर्णा ने राजनीति में कदम रखा। 1998 में वह भाजपा प्रत्याशी रमेश सिंह को हराकर पहली बार विधायक बनीं थी। इसके बाद वर्ष 2000, 2005 व 2009 के विधानसभा चुनाव में भाजपा व अन्य दलों के उम्मीदवारों को हराकर अपनी जीत दर्ज कराई। 2014 में अन्नपूर्णा को हार का मुहं देखना पड़ा। भाजपा प्रत्याशी डाॅ नीरा यादव ने विधानसभा चुनाव में उन्हें शिकस्त दी थी। हालात ये हैं कि कोडरमा लोकसभा क्षेत्र में भाजपा के पांच विधायक हैं। कोडरमा से डाक्टर नीरा यादव, बरकट्ठा से जानकी प्रसाद यादव, बगोदर से नागेंद्र महतो, जमुआ के केदार हाजरा एवं गांडेय से प्रोफेसर जय प्रकाश वर्मा। कोई खुल कर अन्नपूर्णा के विरोध में नहीं बोल रहा है, लेकिन उनका चुनावी सारथी बनने को भी तैयार नहीं ।
हालांकि इस बात से जुंदा होकर अन्नपूर्णा भाजपा विधायकों के अलावे एक- एक कार्यकर्ता को साधने में लगी हैं व दावा कर रही हैं, कि सभी मेरे साथ हैं। कहती हैं कि सबका साथ सबका विकास का नारा कोडरमा में सभी राजनीतिक दलों पर भारी पड़ेगा।
लालटेन से कमल तक का सफर:
सियासत में परिस्थितियां सब पर भारी होती हैं व मौका के अनुसार अपने पराये और पराये अपने हो जाते हैं। स्वाभिमान, सिद्धांत, जमीर इस अभियान के अंग नही होते। विपक्ष में रहकर सत्तापक्ष पर अंगुली उठाने वाले, सवाल करने वाले कब यहां गलबहियां करने लगें ये कहना मुश्किल है। अन्नपूर्णा भी इसी कड़ी की उदाहरण हैं, जिन्होंने अपने राजनीतिक करियर का आगाज 1998 में किया था। ये कोडरमा से चार बार राजद विधायक रह चुकी हैं। राजद की प्रदेश अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। कोडरमा और बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र में अन्नपूर्णा का अपना प्रभाव है। कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के चार विधानसभा क्षेत्र गिरिडीह जिले में आते हैं। गिरिडीह के बगोदर, राजधनवार, गांडेय एवं जमुआ में उन्हें विरोधी दलों से कांटे का मुकाबला करना होगा। 2014 के लोकसभा चुनाव में भी इन गिरिडीह के चार विधानसभा क्षेत्रों में भाजपा के उम्मीदवार पिछड़ गए थे।
कोडरमा और बरकट्ठा विधानसभा क्षेत्र से भाजपा को लंबी बढ़त मिली थी। कोडरमा लोकसभा क्षेत्र के सारे नेता सियासत की गहरी समझ रखने वाले हैं। राजनीति में राज व नीति का फर्क भी बेहतर जानते हैं। डा0 रवींद्र राय का टिकट काटा गया तो उन्होंने चुप्पी साधने में ही भलाई समझा। केवल इतना भर बोले कि वे नरेंद्र मोदी और अमित शाह के फैसले के साथ हैं। बहरहाल इस बार का चुनाव कई मायने में अहम होगा व न सिर्फ अन्नपूर्णा की जीत उनकी चुनौती होगी, बल्कि ये मुख्यमंत्री रघुवर दास के लिए भावी परिणाम देनेवाला होगा।
error: Content is protected !!
WhatsApp chat

हमारे मासिक पत्रिका समृद्ध झारखण्ड की अपनी प्रति आज ही सुरक्षित करने के लिए पर क्लिक करें।