बचपन से ही देख समाज को…

शम्पा बाला


बचपन से ही देख समाज को,
मन में सपना भरता है,
देश का वीर सैनिक कहलाने को,
वह दिन-रात मेहनत करता है।

छोड़ कर अपनी जिंदगानी
सरहद की ओर बढ़ता है,
सुनाने को कोई नई कहानी,
एक नया इतिहास गढ़ता है।

बाबा का शेर, माँ का लाल
परिस्थिति अनुसार ढलता है,
भूलकर अपनी चाल-ढाल,
दुश्मनों के बीच चलता है।

कुर्बान शरीर लिपटा तिरंगे में
एक पहचान दे जाता है,
वो नादान पुरे भारत में
वीर शहीद कहलाता है।

सरहद के जवान की व्यथा
कँहा कोई समझ पाता है,
उसके शहीद होने की कथा
भारत में आँसू बहाता है।

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