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गांडेय में लहराएगा विजय पताका या दोहराएगा इतिहास

क्या हेमन्त की कसौटी पर खरा उतरेंगे डॉ सरफराज़

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रिपोर्ट – आबिद अंजुम

गांडेय(गिरिडीह) : यूं तो चुनाव के दौरान राजनीतिक तापमान चढ़ जाता है, मगर दल बदल की राजनीति ने इस बार राजनीतिक पारा और भी चढ़ा दिया है। क्षेत्र में अपनी दावेदारी को लेकर विभिन्न दलों के नेताओं द्वारा दल बदल का दौर बदस्तूर जारी है। 2019 विधानसभा चुनाव में किसी दल से टिकट कटने के बाद दूसरे दल से टिकट लेने की होड़ मची हुई है। जिस कारण नेताओं के दल बदल में बेतहाशा इज़ाफ़ा भी हुआ है। इस फेहरिस्त में गांडेय विधानसभा से कई नेताओं का नाम शामिल है। जिसमें सबसे महत्वपूर्ण चेहरा कांग्रेस के दिग्गज नेता डॉ सरफराज़ अहमद का है।

गरमा गई है गांडेय की राजनीति

झारखण्ड विधानसभा चुनाव को लेकर झारखण्ड मुक्ति मोर्चा, कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन के बाद गांडेय विधानसभा का सीट जेएमएम के हिस्से में चला गया। गांडेय सीट से जेएमएम द्वारा प्रत्याशी चयन को लेकर संशय लंबे समय तक बना रहा। इस बीच कई नेताओं के नाम की चर्चा गांडेय सीट से जेएमएम के लिए प्रतिनिधित्व करने की होती रही। आखिरकार अंतिम समय में तमाम तमाम अटकलों के बावजूद कांग्रेसी नेता डॉ सरफराज़ अहमद को फाइनल लिस्ट में जगह मिली। डॉ अहमद ने गांडेय से चुनाव लड़ने के लिए कांग्रेस पार्टी छोड़ कर अंतिम समय में जेएमएम का दामन थाम लिया। डॉ अहमद के जेएमएम जॉइन करते ही उन्हें पार्टी आलाकमान द्वारा गांडेय से प्रत्याशी घोषित कर दिया गया। झामुमो से डॉ अहमद के नाम की घोषणा के साथ ही यहाँ का राजनीतिक पारा और भी चढ़ गया है और चर्चाओं का बाजार गर्म हो गया है।

जनता की मांग पर 2005 में भी बदला था दल

बताते चलें कि एक बार पूर्व में भी डॉ सरफराज़ अहमद दल बदल चुके हैं। वर्ष 2005 के विधानसभा चुनाव में झामुमो और कांग्रेस ने गठबंधन के तहत ही चुनाव लड़ा था। तब गांडेय सीट से झामुमो के कद्दावर नेता दिवंगत सलखन सोरेन और कांग्रेस से डॉ अहमद ने टिकट के लिए दावेदारी की थी। मगर तब भी गांडेय सीट झामुमो के खाते में गया था। टिकट कटने के बाद 2005 में भी सरफराज़ अहमद ने कांग्रेस पार्टी को छोड़ कर राष्ट्रीय जनता दल से गांडेय विस से चुनावी मैदान में उतरे थे। मगर इस चुनाव में उन्हें शिकस्त का मुंह देखना पड़ा था। हालांकि चुनावी समर में उन्होंने स्व सलखन सोरेन को कांटे की टक्कर देते हुए मात्र डेढ़ हजार वोट से पीछे रह गए थे। 2005 में स्व सलखन सोरेन गांडेय सीट पर 36849 वोट लेकर जीत का परचम लहराने में सफल हुए थे, जबकि डॉ अहमद 35337 वोट लेकर दूसरे नंबर पर रहे थे।

बिगड़ रहा समीकरण

2019 के विधानसभा चुनाव में भी गांडेय का समीकरण कुछ ऐसा ही बनता दिख रहा है। डॉ अहमद को टिकट दिए जाने के बाद झामुमो के अधिकांश कार्यकर्ता रोष में नज़र आ रहे हैं। झामुमो से टिकट के लिए दावेदारी करने वाली नेत्री स्व सलखन सोरेन की पुत्र वधु कर्मिला टुडू ने भी पार्टी से बगावत कर दिया है। कर्मिला टुडू ने निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा कर दी है और उनके समर्थक उनकी जीत पक्की बता रहे हैं। वहीं कांग्रेस जेएमएम गठबंधन के प्रत्याशी डॉ अहमद के समर्थक भी उन्हें गांडेय से अवसर दिए जाने पर काफी उत्साहित हैं और हेमन्त सोरेन के लिए एक सीट पक्की करने की बात कह रहे हैं।

क्या डॉ अहमद को मिलेगा जनता का आशीर्वाद

इन तमाम बातों के बीच एक बात जो साफ दिखाई दे रही है वह गठबंधन दलों के कार्यकर्ताओं के बीच दरार के रूप में है। ऐसी परिस्थिति में यह कहना शायद गलत नहीं होगा कि दलों के बीच का गठबंधन तो रह गया है मगर दिलों के बीच का बंधन टूटता नज़र आ रहा है। अब ऐसे में देखना यह है कि क्या झामुमो के कार्यकर्ता गठबंधन धर्म का पालन करते हुए डॉ अहमद की जीत सुनिश्चित कराते हुए हेमन्त सोरेन के हाथों को मजबूत करने में अपनी भूमिका निभाएंगे या स्व सलखन सोरेन की विरासत को आगे बढ़ाने के साथ जाएंगे।

देखना यह भी दिलचस्प होगा कि डॉ सरफराज़ अहमद हेमन्त सोरेन की कसौटी पर किस हद तक खरा उतर पाएंगे और गांडेय की जनता का आशीर्वाद उन्हें कितना मिलेगा। नतीजा जो भी आये यह तो भविष्य के गर्त में है, मगर फिलवक्त यह बात चर्चा का विषय बना हुआ है कि क्या बदलते राजनीतिक समीकरण के बीच डॉ सरफराज़ अहमद जीत का पताका लहरायेंगे या गांडेय में 2005 का इतिहास दोहराया जाएगा। मगर क्षेत्र में डॉ अहमद की लोकप्रियता और पकड़ को देखते हुए गांडेय विस सीट उनकी झोली में जाने की बात पक्की बताई जा रही है।