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क्या कार्यकर्ताओं की नाराजगी गिरिडीह में भाजपा को पड़ेगा भारी

गांडेय व जमुआ विधानसभा में मौजूदा कैंडिडेट को लेकर है विरोध

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रिपोर्ट : आबिद अंजुम 

गिरिडीह। झारखंड में विधानसभा की रणभेरी बजते ही सभी दल चुनावी तैयारी में जुटी हुई है। सभी दल अपने अपने कैंडिडेट की घोषणा कर रही है। राजनीतिक तापमान बढ़ा हुआ है और चौक चौराहों पर कैंडिडेट्स और उनकी पकड़ को लेकर चर्चाओं का बाजार भी गर्म है। उम्मीदवारों के नाम के घोषणा के साथ ही रूठने और मनाने का दौर भी चल रहा है। कहीं पार्टी से टिकट नहीं मिलने पर नाराज़ नेता दूसरे दल की तरफ रुख कर रहे तो कहीं किसी प्रत्याशी को टिकट मिलने पर पार्टी के कार्यकर्ताओं में ही विरोध पनप गया है।

 

गांडेय और जमुआ में राह कठिन

ऐसा ही समीकरण देखने को मिल रहा है गिरिडीह के दो विधानसभा क्षेत्र में। जहाँ भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं और घोषित उम्मीदवार के बीच मन मुटाव साफ तौर पर जाहिर हो रहा है। पार्टी आलाकमान द्वारा उम्मीदवार के चयन के बाद भी विरोध और प्रत्याशी बदलने की मांग उठ रही है। हालांकि जमुआ और गांडेय विधानसभा में कैंडिडेट के नाम की घोषणा के पूर्व ही दोनों जगहों के वर्तमान विधायक के खिलाफ पार्टी कार्यकर्ताओं का एक खेमा विरोध करता रहा था। बावजूद इसके भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा दोनों विधानसभा क्षेत्र में वर्तमान विधायक केदार हाजरा और प्रो. जयप्रकाश वर्मा को ही दुबारा अवसर दिया गया है। जिससे इन दोनों का विरोध करने वाले कार्यकर्ताओं ने मुखालफत का मन बना लिया है।

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जमुआ विधायक से असंतुष्ट नेताओं ने खोला मोर्चा

 

यहाँ आपको बताते चलें कि जमुआ विधायक केदार हाजरा की कार्यशैली से उनके ही कुछ कार्यकर्ता नाराज़ चल रहे थे। इन कार्यकर्ताओं ने शीर्ष नेतृत्व ने 2019 विधानसभा चुनाव के लिए जमुआ से प्रत्याशी बदलने की मांग भी की थी। मगर ऐसा नहीं हुआ जिससे विधयाक से नाराज़ चल रहे कार्यकर्ताओं व नेताओं ने खुले आम विरोध की चेतावनी भी दे डाली। शनिवार को भाजपा के कई कार्यकर्ताओं ने जमुआ में बैठक कर विधायक केदार हाजरा के खिलाफ सामूहिक तौर पर मोर्चा खोल दिया है। इन कार्यकर्ताओं का साफ तौर पर कहना है कि अगर शीर्ष नेतृत्व जमुआ से अब भी उम्मीदवार नहीं बदलता है तो इसका खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़ेगा।

 

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स्थानीय नेताओं की उपेक्षा से गांडेय में नाराज़गी

 

वहीं अगर बात गांडेय की करें तो यहाँ भी पार्टी के अंदर ही विधायक जयप्रकाश वर्मा का विरोध चुनावी ऐलान के पहले से ही शुरू हो गया था। गांडेय में स्थानीय और बाहरी के नाम पर वर्तमान विधायक के खिलाफ सुगबुगाहट शुरू हुई थी। गांडेय विधानसभा क्षेत्र के कई पुराने कार्यकर्ताओं ने सामूहिक रूप से मिलकर स्थानीय उम्मीदवार को अवसर देने की मांग भी की थी। चुनाव की तिथि घोषणा के बाद कई स्थानीय नेताओं ने टिकट को लेकर दावेदारी भी पेश किया था। दावेदारी करने वाले नेताओं को यह भरोसा था कि गांडेय के वर्तमान विधायक जयप्रकाश वर्मा से मुख्यमंत्री रघुवर दास की नाराजगी उनके हक में फैसला देगा। मगर तमाम अटकलों के बाद आखिरकार भाजपा शीर्ष नेतृत्व द्वारा दुबारा प्रो जयप्रकाश वर्मा को ही अवसर मिला।

प्रो जयप्रकाश वर्मा को टिकट मिलने के बाद गांडेय विधानसभा से भाजपा के कार्यकर्ता सुनील यादव ने तो साफ तौर पर निर्दलीय चुनाव लड़ने की घोषणा तक कर दी है। जबकि विधयाक से नाराज़ चल रहे नेताओं का खेमा शीर्ष नेतृत्व के फैसले पर खमोशी इख्तियार किये हुए है।

 

आसान नहीं होगी जीत की राह

 

अब ऐसे में देखना यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या पार्टी के पुराने कार्यकर्ताओं की नाराज़गी को दूर किया जा सकेगा या इसकी कीमत भाजपा को चुकानी पड़ेगी। अगर कार्यकर्ताओं को समझाने और मनाने में भाजपा खेमा असफल रहा तो जमुआ और गांडेय विधानसभा सीट पर जीत दर्ज कराना काफी मुश्किल साबित हो सकता है।

 

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