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कभी सोचे ना थे, महादेव: अन्याय और आस्था पर भावुक कविता

कभी सोचे ना थे, महादेव: अन्याय और आस्था पर भावुक कविता “कभी सोचे ना थे, महादेव” एक भावनात्मक कविता है, जिसमें अन्याय, पीड़ा और आस्था का गहरा चित्रण किया गया है। कवि ने महादेव से संवाद के माध्यम से जीवन में आए कठिन समय, एकतरफा सजा और न्याय व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं।
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“उस दौर से इस दौर तक”: बाबा साहेब के संघर्ष की प्रेरक गाथा

“उस दौर से इस दौर तक”: बाबा साहेब के संघर्ष की प्रेरक गाथा “उस दौर से इस दौर तक” कविता समाज के संघर्ष, पीड़ा और बदलाव की कहानी को प्रस्तुत करती है। यह रचना बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर के योगदान और दलित समाज के उत्थान को भावनात्मक रूप से दर्शाती है।
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“मायके की यादें”: मां के बिना सूना घर और भावनाओं का सैलाब

“मायके की यादें”: मां के बिना सूना घर और भावनाओं का सैलाब “मायके की यादें” एक भावनात्मक लघुकथा है, जो मां के जाने के बाद मायके लौटने वाली बेटी की संवेदनाओं को दर्शाती है। सूने आंगन, बंद कमरों और बचपन की यादों के बीच वह मां के स्नेह और दुलार को महसूस करती है।
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“तपस्या”: मां के संघर्ष से IPS बनी बेटी की प्रेरक कहानी

“तपस्या”: मां के संघर्ष से IPS बनी बेटी की प्रेरक कहानी “तपस्या” एक मार्मिक लघुकथा है, जो एक मां के संघर्ष, त्याग और दृढ़ संकल्प को दर्शाती है। समाज की रूढ़िवादी सोच के खिलाफ लड़ते हुए मीना अपनी बेटी को पढ़ाने के लिए घर छोड़ देती है।
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“बिजली रानी” कविता में बिजली संकट पर व्यंग्यात्मक प्रहार

“बिजली रानी” कविता में बिजली संकट पर व्यंग्यात्मक प्रहार कवि अनिल गुड्डू की कविता “बिजली रानी” बिजली कटौती और उससे होने वाली आम लोगों की परेशानियों को व्यंग्यात्मक और भावपूर्ण शैली में प्रस्तुत करती है।
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अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एमपी अध्याय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन संपन्न

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर एमपी अध्याय द्वारा अंतर्राष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन संपन्न अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर मकस कहानिका हिंदी पत्रिका के एमपी अध्याय द्वारा 10 मार्च 2026 को गूगल मीट के माध्यम से एक भव्य अंतरराष्ट्रीय ऑनलाइन कवि सम्मेलन आयोजित किया गया।
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आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता

आग उगलते देखा है! — देशभक्ति से ओतप्रोत कविता “आग उगलते देखा है” एक सशक्त कविता है जो समाज, देश और बदलते इतिहास की पीड़ा व चेतना को उजागर करती है। कवि ने मिट्टी, संघर्ष और जनमानस की ताकत को प्रतीकात्मक रूप में प्रस्तुत किया है। कविता बताती है कि समय आने पर शांत दिखने वाली शक्तियां भी परिवर्तन की ज्वाला बन सकती हैं।
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‘नियति’ शोषण और स्वार्थ की सच्चाई बयान करती कविता

‘नियति’ शोषण और स्वार्थ की सच्चाई बयान करती कविता कविता “नियति” मानव जीवन के उस कटु सत्य को उजागर करती है जिसमें स्वार्थ और शोषण का चक्र निरंतर चलता रहता है। चिता पर जलती लाश के साथ जूँ के जलने का उदाहरण देकर कवि ने यह दिखाया है कि शोषण करने वाला अंततः स्वयं भी उसी नियति का शिकार बनता है।
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'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल

'जादूगर’ कविता में सत्ता और व्यवस्था पर तीखा सवाल कवि राजेश पाठक की कविता “जादूगर” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक परिस्थितियों पर तीखा व्यंग्य प्रस्तुत करती है। कविता में प्रशासनिक भ्रष्टाचार, कानून की कमजोर स्थिति, किसानों और आम जनता की परेशानियों तथा व्यवस्था की निष्क्रियता को प्रभावशाली ढंग से उजागर किया गया है।
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आज का जीवन: रिश्तों से दूर होती संवेदनाओं की कविता

आज का जीवन: रिश्तों से दूर होती संवेदनाओं की कविता “आज का जीवन” कविता आधुनिक समाज में बढ़ती स्वार्थ भावना, टूटते रिश्तों और प्रकृति से दूर होते मनुष्य की पीड़ा को सरल और भावपूर्ण शब्दों में व्यक्त करती है।
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बिटिया रानी: शहीद पिता की याद में भावुक कविता

बिटिया रानी: शहीद पिता की याद में भावुक कविता “बिटिया रानी” कविता एक शहीद सैनिक की बेटी की भावनाओं को मार्मिक ढंग से प्रस्तुत करती है। कविता में बेटी अपने पिता को याद करते हुए सवाल करती है और उनके बिना जीवन की कठिनाइयों को व्यक्त करती है।
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कैसी है सरकार? — व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर तीखी सामाजिक कविता

कैसी है सरकार? — व्यवस्था और भ्रष्टाचार पर तीखी सामाजिक कविता राजेश पाठक की कविता “कैसी है सरकार?” वर्तमान सामाजिक और राजनीतिक व्यवस्था पर तीखा सवाल उठाती है। कविता में भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, शिक्षा व्यवस्था की कमजोरी, महिलाओं की सुरक्षा, राजनीतिक अवसरवाद और आम जनता की परेशानियों को मार्मिक शब्दों में व्यक्त किया गया है।
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