Breaking news: CM ने दिया इस्तीफा: वर्षों की राजनीति के एक युग का अंत, फैसले से सियासी हलचल तेज
CM ने दिया इस्तीफा: दो दशक से जारी राजनीतिक दौर का एक अहम अध्याय समाप्त हो गया है। आज राजनीति में एक बड़ा घटनाक्रम सामने आया, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद की सदस्यता छोड़ने का फैसला लिया। उन्होंने अपना इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को सौंप दिया, जिसके बाद वे अब बिहार विधानमंडल के सदस्य नहीं रहेंगे। यह कदम इसलिए भी खास माना जा रहा है क्योंकि नीतीश कुमार करीब 20 वर्षों तक लगातार विधान परिषद के सदस्य के रूप में सक्रिय रहे और राज्य की राजनीति में केंद्रीय भूमिका निभाते रहे।
पटना: बिहार की राजनीति में सोमवार, 30 मार्च 2026 को एक बड़ा बदलाव देखने को मिला, जब मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने बिहार विधान परिषद (MLC) की सदस्यता से इस्तीफा दे दिया. यह कदम उनके हाल ही में राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद उठाया गया, क्योंकि संविधान के नियमों के अनुसार किसी व्यक्ति को एक साथ दो विधायी सदनों की सदस्यता रखने की अनुमति नहीं होती.
सूत्रों के अनुसार, नीतीश कुमार 16 मार्च 2026 को राज्यसभा के लिए निर्वाचित हुए थे और उन्हें 14 दिनों के भीतर अपनी राज्य की सीट खाली करना अनिवार्य था. इसी संवैधानिक आवश्यकता को पूरा करने के लिए उनका इस्तीफा विधान परिषद के सभापति को सौंपा गया.

हालांकि, संवैधानिक प्रावधानों के तहत नीतीश कुमार बिना किसी सदन के सदस्य बने हुए भी अधिकतम छह महीने तक मुख्यमंत्री पद पर बने रह सकते हैं. इस दौरान उन्हें या तो किसी सदन का सदस्य बनना होगा या फिर नए नेतृत्व को जिम्मेदारी सौंपनी पड़ सकती है.
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि उपमुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और केंद्रीय मंत्री नित्यानंद राय जैसे नेताओं के नाम संभावित उत्तराधिकारी के रूप में सामने आ रहे हैं. आने वाले दिनों में बिहार की सत्ता संरचना में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं, जिससे राज्य की राजनीति में एक नए दौर की शुरुआत होने की संभावना जताई जा रही है.
