Viral MMS Video से सावधान! लिंक पर क्लिक करते ही शुरू हो जाता है साइबर स्कैम
नवंबर 2025 के अंत में सोशल मीडिया पर एक कथित 19 मिनट 34 सेकंड का निजी वीडियो वायरल होने का दावा किया गया. बताया गया कि यह वीडियो एक होटल रूम में शूट हुआ था. Telegram, Instagram और WhatsApp जैसे प्लेटफॉर्म पर “19 मिनट फुल HD वीडियो”, “फुल लिंक”, और “MMS लीक” जैसे कीवर्ड के साथ शॉर्ट लिंक लगातार शेयर किए गए.
कई यूज़र्स को इन लिंक के जरिए पूरा वीडियो देखने का लालच दिया गया.
साइबर एक्सपर्ट और मीडिया रिपोर्ट बताते हैं कि ऐसा कोई ऑथेंटिक 19 मिनट MMS पब्लिक डोमेन में मौजूद नहीं है. जो क्लिप्स शेयर की जा रही हैं, वे डीपफेक या पुराने कंटेंट का एडिटेड रूप हैं. कई मामलों में किसी वास्तविक इन्फ्लुएंसर या कपल का नाम जोड़कर भीड़ को भड़काया गया, जबकि बाद में पता चला कि वीडियो में दिख रहे चेहरे असली व्यक्तियों से मेल ही नहीं खाते.
अब बात करते हैं स्कैम की.

यह स्कैम खास तौर पर उन बैंकिंग ट्रोजन्स का इस्तेमाल कर रहा है जो मोबाइल को रिमोट कंट्रोल में बदल देते हैं. मालवेयर नकली लॉगिन स्क्रीन दिखाकर UPI PIN, कार्ड डिटेल्स और OTP चुरा लेता है. इसके बाद बैकग्राउंड में ट्रांजैक्शन चलाए जाते हैं, और यूज़र को तब पता चलता है जब अकाउंट में रकम कम हो चुकी होती है.
रिपोर्ट्स में यह भी सामने आया है कि टीनएज लड़के-लड़कियों, खासकर लड़कियों को टारगेट किया जाता है. फर्जी मैसेज भेजकर कहा जाता है कि “तुम्हारा वीडियो वायरल हो गया है” जिससे डर पैदा होता है. इसी डर का फायदा उठाकर उन्हें लिंक खोलने या पैसों की मांग मानने पर मजबूर किया जाता है.
कानूनी तौर पर भी ऐसे वीडियो देखना, डाउनलोड करना या फॉरवर्ड करना अपराध है. IT Act और भारतीय कानूनों के अनुसार बिना सहमति वाला या नाबालिग से संबंधित अश्लील कंटेंट रखना या शेयर करना गिरफ्तारी और डिवाइस जब्ती तक ले जा सकता है.
ऐसे फर्जी वीडियो पीड़ितों के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डालते हैं. डीपफेक टेक्नोलॉजी की वजह से किसी का चेहरा उठाकर अश्लील वीडियो में लगाना आसान हो गया है, लेकिन इसका परिणाम साइबर बुलिंग, ऑनलाइन शेमिंग और कई बार आत्महत्या जैसे कदमों तक पहुंच जाता है.
सुरक्षा कैसे रखें?
किसी भी संदिग्ध या अश्लील वीडियो का फुल लिंक मांगना ही सबसे बड़ा खतरा है. अनजान लिंक, शॉर्ट URL, टेलीग्राम चैनल इनवाइट और पॉप-अप से दूर रहें. सिर्फ आधिकारिक Play Store या App Store से ही ऐप डाउनलोड करें. फोन में रियल-टाइम एंटीवायरस रखें और परमीशन हमेशा जांचें.
अगर गलती से क्लिक हो जाए तो ब्राउज़र तुरंत बंद करें, संदिग्ध ऐप हटाएं और फोन को एंटीवायरस से स्कैन करें. नेट बैंकिंग और UPI के पासवर्ड बदलें. किसी भी संदिग्ध ट्रांजैक्शन पर तुरंत बैंक से संपर्क करें और साइबर क्राइम पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं.
