E-Challan Scam 2025: ट्रैफिक चालान के नाम पर भेजी जा रही APK फाइलें बना रहीं लाखों का शिकार
समृद्ध डेस्क: E-Challan के नाम पर व्हाट्सऐप पर भेजी जा रही फर्जी APK फाइलें एक खतरनाक साइबर फ्रॉड हैं, जिनसे लोगों के मोबाइल फोन हैक हो रहे हैं और बैंक अकाउंट तक खाली हो जा रहे हैं। यह स्कैम खास तौर पर उन यूजर्स को निशाना बना रहा है जो डर या जल्दबाजी में ट्रैफिक चालान के नाम पर आई फाइल को तुरंत डाउनलोड कर लेते हैं।
स्कैम कैसे शुरू होता है?
साइबर ठग सबसे पहले आपके मोबाइल नंबर पर SMS या व्हाट्सऐप मैसेज भेजते हैं, जिसमें लिखा होता है कि आपके वाहन पर ई-चालान कट गया है और डिटेल देखने के लिए नीचे दी गई फाइल या लिंक डाउनलोड करें। इस मैसेज के साथ आमतौर पर एक APK फाइल अटैच होती है, जिसका नाम RTO_Challan.apk, E-Challan_Details.apk, E-Vahan Challan या M VAHAN Challan जैसा रखा जाता है ताकि यह असली सरकारी फाइल लगे। कई बार मैसेज में गाड़ी नंबर, चालान नंबर या फाइन अमाउंट जैसा डाटा भी लिखा जाता है ताकि यूजर को सब कुछ ऑथेंटिक लगे और वह बिना सोचे क्लिक कर दे।
APK फाइल क्या है और यह खतरनाक क्यों?

फोन हैक होने के बाद क्या-क्या होता है?
फाइल इंस्टॉल होते ही हैकर्स को फोन के कई जरूरी परमिशन मिल जाते हैं, जिनकी मदद से वे आपके बैंकिंग ऐप्स, UPI एप्लीकेशन और SMS/OTP तक पहुंच बना लेते हैं। मैलवेयर की वजह से स्कैमर आपके स्क्रीन पर दिख रहे कंटेंट को पढ़ सकता है, ऑटोमैटिक क्लिक कर सकता है और बैंक ऐप या UPI में बिना आपकी जानकारी के ट्रांजैक्शन शुरू कर सकता है। कई केसों में देखा गया है कि ऐसी फर्जी RTO e-challan या ट्रैफिक चालान APK इंस्टॉल करने के बाद पीड़ितों के खाते से कुछ ही मिनटों में लाखों रुपये तक UPI या नेट बैंकिंग के जरिए निकाले गए। सबसे खतरनाक बात यह है कि वही वायरस आपके व्हाट्सऐप कॉन्टैक्ट्स पर भी वही फर्जी APK फाइल ऑटोमैटिक भेज सकता है, जिससे स्कैम चेन की तरह तेजी से फैलता है और आपके दोस्त-रिश्तेदार भी शिकार बन सकते हैं।
असली ई-चालान कहां और कैसे चेक करें?
असली ट्रैफिक ई-चालान की जानकारी सिर्फ सरकार की आधिकारिक वेबसाइट echallan.parivahan.gov.in या संबंधित राज्य पुलिस/ट्रैफिक विभाग की साइट या ऐप पर उपलब्ध होती है। अगर किसी मैसेज में लिखा हो कि चालान डिटेल देखने के लिए APK फाइल डाउनलोड करें या किसी गैर-सरकारी लिंक पर क्लिक करें, तो वह लगभग निश्चित रूप से फ्रॉड है। ई-चालान या अन्य सरकारी नोटिस कभी भी APK फाइल के रूप में नहीं भेजे जाते; शादी का कार्ड, PDF डॉक्यूमेंट, फोटो या स्कैन कॉपी भी सामान्यतः PDF, JPG या लिंक फॉर्मेट में आते हैं, न कि APK में।
बचाव के लिए जरूरी सेफ्टी टिप्स
ऐसी ठगी से बचने के लिए सबसे पहला नियम है कि व्हाट्सऐप, SMS, ईमेल या सोशल मीडिया से आई किसी भी APK फाइल को कभी डाउनलोड या इंस्टॉल न करें, चाहे वह RTO, बैंक, KYC, सब्सिडी या चालान के नाम पर क्यों न हो। फोन की सेटिंग में जाकर Unknown Sources या Install unknown apps वाला ऑप्शन बंद रखें, ताकि प्ले स्टोर के अलावा किसी भी सोर्स से ऐप इंस्टॉल ही न हो पाए। अगर करीबी दोस्त या रिश्तेदार के नाम से भी कोई APK आए, तो पहले उन्हें फोन कर के कन्फर्म करें, क्योंकि संभव है उनका व्हाट्सऐप पहले से हैक हो चुका हो और स्कैमर उनकी प्रोफाइल से मैसेज भेज रहे हों। गलती से APK इंस्टॉल हो जाए तो तुरंत मोबाइल डेटा और वाई-फाई बंद करें, संदिग्ध ऐप को अनइंस्टॉल करें, फोन में एंटीवायरस/सिक्योरिटी स्कैन चलाएं और सभी बैंकिंग पासवर्ड व UPI PIN तुरंत बदलें। अगर पैसे निकल जाएं या फ्रॉड का शक भी हो तो तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करके शिकायत दर्ज करें और अपनी नजदीकी पुलिस या साइबर थाने में भी रिपोर्ट करें।
डिजिटल दौर में बढ़ता साइबर फ्रॉड
ऑनलाइन पेमेंट, UPI और मोबाइल बैंकिंग के तेजी से बढ़ने के साथ ही साइबर अपराधियों के पास लोगों को ठगने के ज्यादा मौके और टारगेट मिल गए हैं। बुजुर्ग, कम तकनीकी जानकारी वाले यूजर्स या वे लोग जो सरकारी चालान, सब्सिडी या बैंक से जुड़े मैसेज देखकर घबरा जाते हैं, ऐसे स्कैम में जल्दी फंस जाते हैं और एक गलत क्लिक में उनकी सालों की जमा पूंजी खतरे में पड़ जाती है। इसलिए सतर्क रहना, आधिकारिक सोर्स से ही इंफॉर्मेशन चेक करना और दूसरों को भी ऐसे e-Challan और APK स्कैम के बारे में जागरूक करना आज के डिजिटल वर्ल्ड में बहुत जरूरी हो गया है।
